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ramdharisinghdinkar कवि : रामधारी सिंह दिनकर 
किताब : आत्मा की आंखें .
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एक दिन मुझे हनी सिंह बनना है तो दूसरे दिन अक्षय कुमार
..
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. असल में जिस दिन मैं जैसे पढ़ता हूं मैं वैसा ही हो जाता हूं .
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.#wordporn #ramdharisinghdinkar #hindisongs #hindilines #hindimemes #hindipoems #hindipoet #hindilitrature #hindipoem #hindinama #writer #writersofinstagram #writersblock #writing #premchand #rekta#varungrover #saurabhdwivedi

कवि : रामधारी सिंह दिनकर किताब : आत्मा की आंखें . . एक दिन मुझे हनी सिंह बनना है तो दूसरे दिन अक्षय कुमार .. . . असल में जिस दिन मैं जैसे पढ़ता हूं मैं वैसा ही हो जाता हूं . . . . . .#wordporn #ramdharisinghdinkar #hindisongs #hindilines #hindimemes #hindipoems #hindipoet #hindilitrature #hindipoem #hindinama #writer #writersofinstagram #writersblock #writing #premchand #rekta#varungrover #saurabhdwivedi

0
8/20/2019
20
ramdharisinghdinkar Our very prestigious play ‘RASHMIRATHI’ will be staged in Mumbai today,18th August 2019, 7.30 onwards.
.
➡️Venue :- Footlight, Kreating Character, Mhada, Mumbai.
.
✅Tickets available on @bookmyshowin and also at the Venue

If in Mumbai, don’t miss this😁
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#Drama #Play #Rashmirathi #Mahabharat #Unique #Prestigious #ImranKhan #MujeebKhan #RamdhariSinghDinkar

Our very prestigious play ‘RASHMIRATHI’ will be staged in Mumbai today,18th August 2019, 7.30 onwards. . ➡️Venue :- Footlight, Kreating Character, Mhada, Mumbai. . ✅Tickets available on @bookmyshowin and also at the Venue If in Mumbai, don’t miss this😁 . #Drama #Play #Rashmirathi #Mahabharat #Unique #Prestigious #ImranKhan #MujeebKhan #RamdhariSinghDinkar

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8/17/2019
21
ramdharisinghdinkar Another Marvel from dinkar#kurukshetra#ramdharisinghdinkar

Another Marvel from dinkar#kurukshetra#ramdharisinghdinkar

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8/17/2019
33
ramdharisinghdinkar I loved reading #ramdharisinghdinkar ji when i was a child..but then i’ve grown up and #dinkar ji ki kahaniyan friends ko sunate hue cool bhi to nhi lgta tha coz sb log  #shakespeare ko i jante the so i tried reading shakespeare. And as expected i failed miserably.. 😬😬 Then i realized k mujhe writer bdlne ki jrurt nhi h..apni company bdl lungi to bhi mera kaam chl jaega..wo log jo dinkar ji ko pdhte h ya sunna chahte h..un log ko ye sb cool lgega..🤭🤭 and here i am.. reading dinkar ji again..🙈🙈🙈😍😍😍 #reading #parshuramkipratiksha #poetry #poem #writer #love #life #happiness #peace #readingmode #backtobasics #hindi #kavita #hindipoetry #writing #girlwhoblogtoexpress #insta #instagram #perfectday

I loved reading #ramdharisinghdinkar ji when i was a child..but then i’ve grown up and #dinkar ji ki kahaniyan friends ko sunate hue cool bhi to nhi lgta tha coz sb log #shakespeare ko i jante the so i tried reading shakespeare. And as expected i failed miserably.. 😬😬 Then i realized k mujhe writer bdlne ki jrurt nhi h..apni company bdl lungi to bhi mera kaam chl jaega..wo log jo dinkar ji ko pdhte h ya sunna chahte h..un log ko ye sb cool lgega..🤭🤭 and here i am.. reading dinkar ji again..🙈🙈🙈😍😍😍 #reading #parshuramkipratiksha #poetry #poem #writer #love #life #happiness #peace #readingmode #backtobasics #hindi #kavita #hindipoetry #writing #girlwhoblogtoexpress #insta #instagram #perfectday

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8/17/2019
36
ramdharisinghdinkar किताब: आत्मा की आंखें
कवि: रामधारी सिंह दिनकर.
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. मच्छर से तुलना होने पर पता चला कि मच्छर भी हमसे श्रेष्ठ है. #ramdharisinghdinkar
#hindipoem #hindilines #hindimemes #hindilitrature #kavita #kavi #premchand #indianbooks #instawrites #instagram #instawrite #writersofinstagram #lekhaksahab #ttl #hindinama#rekta

किताब: आत्मा की आंखें कवि: रामधारी सिंह दिनकर. . . . मच्छर से तुलना होने पर पता चला कि मच्छर भी हमसे श्रेष्ठ है. #ramdharisinghdinkar #hindipoem #hindilines #hindimemes #hindilitrature #kavita #kavi #premchand #indianbooks #instawrites #instagram #instawrite #writersofinstagram #lekhaksahab #ttl #hindinama#rekta

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8/17/2019
57
ramdharisinghdinkar तृतीय सर्ग - रश्मि रथी
#rashmirathi🙏🏻 #ramdharisinghdinkar

तृतीय सर्ग - रश्मि रथी #rashmirathi🙏🏻 #ramdharisinghdinkar

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8/16/2019
14
ramdharisinghdinkar कौन कहे ? प्रेम जगत की सबसे बड़ी उलज़न हैं
जो अलभ्य जो असाध्य उसी को चाहता 'मन' हैं
#ramdharisinghdinkar ji
#somewhere  on
#earth 
#beautiful  #nature 
#love #awesome #creation

कौन कहे ? प्रेम जगत की सबसे बड़ी उलज़न हैं जो अलभ्य जो असाध्य उसी को चाहता 'मन' हैं #ramdharisinghdinkar ji #somewhere on #earth #beautiful #nature #love #awesome #creation

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8/16/2019
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ramdharisinghdinkar Our very prestigious play ‘RASHMIRATHI’ will be staged in Mumbai on 18th August 2019.
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➡️Venue :- Footlight, Kreating Character, Mhada, Mumbai.
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✅Tickets available on @bookmyshowin

If in Mumbai, don’t miss this😁
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#Drama #Play #Rashmirathi #Mahabharat #Unique #Prestigious #ImranKhan #MujeebKhan #RamdhariSinghDinkar

Our very prestigious play ‘RASHMIRATHI’ will be staged in Mumbai on 18th August 2019. . ➡️Venue :- Footlight, Kreating Character, Mhada, Mumbai. . ✅Tickets available on @bookmyshowin If in Mumbai, don’t miss this😁 . #Drama #Play #Rashmirathi #Mahabharat #Unique #Prestigious #ImranKhan #MujeebKhan #RamdhariSinghDinkar

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8/13/2019
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ramdharisinghdinkar महान कवि रामधारी सिंह दिनकर जी की शक्ति और क्षमा से कुछ पंक्तियाँ |
#hindi #hindipoem #hindipoetry #ramdharisinghdinkar #forgiveness #power #hindibhasha #rashtrabhasha #matrabhasha #hindikavita #communityofpoets #poetsofindia #writersofinstagram #writer

महान कवि रामधारी सिंह दिनकर जी की शक्ति और क्षमा से कुछ पंक्तियाँ | #hindi #hindipoem #hindipoetry #ramdharisinghdinkar #forgiveness #power #hindibhasha #rashtrabhasha #matrabhasha #hindikavita #communityofpoets #poetsofindia #writersofinstagram #writer

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8/9/2019
34
ramdharisinghdinkar रामधारी सिंह "दिनकर" की कलम से प्रस्तुत है ।  शत्रु से मैं खुद निबटना जानता हूँ, मित्र से पर, देव ! तुम रक्षा करो। #RamdhariSinghDinkar #KalamSe
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#Writersofinstagram #igpoets #wordporn #writersofindia #micropoetry 
#poemsofig #wordgasm #writersofinstagram #writeraofindia #indianwriters #poetsofindia #poetry #stories #storytelling #poetrycommunity #hindi_poetry #hindikavita #hindi_shayari #hindilover #hindiwriting #hindiwriter 
#loveshayari #hindipoets #hindishayari #nojotoofficial #Nojoto #Nojotoapp #nojotohindi

रामधारी सिंह "दिनकर" की कलम से प्रस्तुत है । शत्रु से मैं खुद निबटना जानता हूँ, मित्र से पर, देव ! तुम रक्षा करो। #RamdhariSinghDinkar #KalamSe . . . . . . . #Writersofinstagram #igpoets #wordporn #writersofindia #micropoetry #poemsofig #wordgasm #writersofinstagram #writeraofindia #indianwriters #poetsofindia #poetry #stories #storytelling #poetrycommunity #hindi_poetry #hindikavita #hindi_shayari #hindilover #hindiwriting #hindiwriter #loveshayari #hindipoets #hindishayari #nojotoofficial #Nojoto #Nojotoapp #nojotohindi

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8/8/2019
307
ramdharisinghdinkar अनोखा तोहफा जो इस वादे के साथ दिया जाए कि उस तोहफे का उपयोग कर वो उसी मित्र को वापस कर दिया जाए जिसने वो आपको दिया,
तभी वो आपको नए तोहफे देगा.... ये वो अनमोल तोहफा जो आपमें, लेखन की कला को बढ़ावा देगा, आपको और पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा, आपकी सोचने समझने की शक्ति को बढ़ाएगा, आप खुद ब खुद अपनी सोच, समझ और स्वभाव में वजन महसूस करेंगे।
ऐसा वजन जिसकी कीमत अनमोल है एक ऐसे समाज में जहां लोग ज्ञान का आदान प्रदान करने में हिचकिचाते नहीं बल्कि एक दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ाते हैं। ज्यादा लिख दिया अगली पोस्ट इस तोहफे को पढ़ने के बाद....अगले तोहफे तक आप भी कुछ न कुछ पढ़ते रहिए.... Follow us @shorgul_2019
#शोरगुल #अनुभव_अनुभूति #AS #RadhaKrishnaLove #LoveQuotes #feelings  #emotional #emotions #randomquotes #shorgul_2019
#TrueLove #truelove #truelovequotes #Motivation #SelfMotivation #instagram  #ramdharisinghdinkar #उर्वशी #urwashi #हिंदी #Author #booklover #साहित्य #follow

अनोखा तोहफा जो इस वादे के साथ दिया जाए कि उस तोहफे का उपयोग कर वो उसी मित्र को वापस कर दिया जाए जिसने वो आपको दिया, तभी वो आपको नए तोहफे देगा.... ये वो अनमोल तोहफा जो आपमें, लेखन की कला को बढ़ावा देगा, आपको और पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा, आपकी सोचने समझने की शक्ति को बढ़ाएगा, आप खुद ब खुद अपनी सोच, समझ और स्वभाव में वजन महसूस करेंगे। ऐसा वजन जिसकी कीमत अनमोल है एक ऐसे समाज में जहां लोग ज्ञान का आदान प्रदान करने में हिचकिचाते नहीं बल्कि एक दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ाते हैं। ज्यादा लिख दिया अगली पोस्ट इस तोहफे को पढ़ने के बाद....अगले तोहफे तक आप भी कुछ न कुछ पढ़ते रहिए.... Follow us @shorgul_2019 #शोरगुल #अनुभव_अनुभूति #AS #RadhaKrishnaLove #LoveQuotes #feelings #emotional #emotions #randomquotes #shorgul_2019 #TrueLove #truelove #truelovequotes #Motivation #SelfMotivation #instagram #ramdharisinghdinkar #उर्वशी #urwashi #हिंदी #Author #booklover #साहित्य #follow

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8/5/2019
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ramdharisinghdinkar अनोखा तोहफा जो इस वादे के साथ दिया जाए कि उस तोहफे का उपयोग कर वो उसी मित्र को वापस कर दिया जाए जिसने वो आपको दिया,
तभी वो आपको नए तोहफे देगा.... ये वो अनमोल तोहफा जो आपमें, लेखन की कला को बढ़ावा देगा, आपको और पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा, आपकी सोचने समझने की शक्ति को बढ़ाएगा, आप खुद ब खुद अपनी सोच, समझ और स्वभाव में वजन महसूस करेंगे।
ऐसा वजन जिसकी कीमत अनमोल है एक ऐसे समाज में जहां लोग ज्ञान का आदान प्रदान करने में हिचकिचाते नहीं बल्कि एक दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ाते हैं। ज्यादा लिख दिया अगली पोस्ट इस तोहफे को पढ़ने के बाद....अगले तोहफे तक आप भी कुछ न कुछ पढ़ते रहिए.... #ramdharisinghdinkar #उर्वशी #urwashi #हिंदी #Author #booklover #साहित्य #भारत

अनोखा तोहफा जो इस वादे के साथ दिया जाए कि उस तोहफे का उपयोग कर वो उसी मित्र को वापस कर दिया जाए जिसने वो आपको दिया, तभी वो आपको नए तोहफे देगा.... ये वो अनमोल तोहफा जो आपमें, लेखन की कला को बढ़ावा देगा, आपको और पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा, आपकी सोचने समझने की शक्ति को बढ़ाएगा, आप खुद ब खुद अपनी सोच, समझ और स्वभाव में वजन महसूस करेंगे। ऐसा वजन जिसकी कीमत अनमोल है एक ऐसे समाज में जहां लोग ज्ञान का आदान प्रदान करने में हिचकिचाते नहीं बल्कि एक दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ाते हैं। ज्यादा लिख दिया अगली पोस्ट इस तोहफे को पढ़ने के बाद....अगले तोहफे तक आप भी कुछ न कुछ पढ़ते रहिए.... #ramdharisinghdinkar #उर्वशी #urwashi #हिंदी #Author #booklover #साहित्य #भारत

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8/5/2019
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ramdharisinghdinkar कवि : रामधारी  दिनकर 
किताब : आत्मा कि  आंखे .
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 #wordporn #ramdharisinghdinkar #hindisongs #hindilines #captions #hindilitrature #hindimemes #hindinama #hindipoem #urdushayeri #shayri #rekta #instawrites #instawrite #writersofinstagram

कवि : रामधारी दिनकर किताब : आत्मा कि आंखे . . . . . . . #wordporn #ramdharisinghdinkar #hindisongs #hindilines #captions #hindilitrature #hindimemes #hindinama #hindipoem #urdushayeri #shayri #rekta #instawrites #instawrite #writersofinstagram

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7/30/2019
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ramdharisinghdinkar कवि : रामधारी सिहं दिनकर 
किताब : आत्मा कि आन्खे.
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. (मुझे तुम जैसी  तो  नही  चाहिये ) 
हम  सब यहिं रुके  हैं । कोइ  सही  नही  है .. अब  तुम्हारे  जाने  के अलावा. .
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.#ramdharisinghdinkar #wordporn #poems #hindi #kavita#hindilines #hindilitrature #hindinama #hindipoet #kavi #hindicaptions #writer #urdushayeri #shayri #instawrites #writersofinstagram #kavita #kahani

कवि : रामधारी सिहं दिनकर किताब : आत्मा कि आन्खे. . . .. . . . . (मुझे तुम जैसी तो नही चाहिये ) हम सब यहिं रुके हैं । कोइ सही नही है .. अब तुम्हारे जाने के अलावा. . . . . . . .#ramdharisinghdinkar #wordporn #poems #hindi #kavita#hindilines #hindilitrature #hindinama #hindipoet #kavi #hindicaptions #writer #urdushayeri #shayri #instawrites #writersofinstagram #kavita #kahani

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7/29/2019
20
ramdharisinghdinkar हर किसी को प्रेम की तलाश होती है।
लेकिन क्या हो अगर किसी धरतीवासी को किसी अप्सरा से प्रेम हो जाये?
दिनकररचित उर्वशी इसी प्रेम पर आधारित काव्यकृति है जिसमें पुरुरवा और उर्वशी के बीच के प्रेम-संबंध को कवि ने छन्दबद्ध किया है। इसी काव्य का एक हिस्सा - (link in bio )

#hindikavita #urdustudio #kavi #shayar #hindiquote #urdu #hindi #language #shayari #kavita #hindistudio #dinkar #ramdharisinghdinkar #urvashi #gungunupreti

हर किसी को प्रेम की तलाश होती है। लेकिन क्या हो अगर किसी धरतीवासी को किसी अप्सरा से प्रेम हो जाये? दिनकररचित उर्वशी इसी प्रेम पर आधारित काव्यकृति है जिसमें पुरुरवा और उर्वशी के बीच के प्रेम-संबंध को कवि ने छन्दबद्ध किया है। इसी काव्य का एक हिस्सा - (link in bio ) #hindikavita #urdustudio #kavi #shayar #hindiquote #urdu #hindi #language #shayari #kavita #hindistudio #dinkar #ramdharisinghdinkar #urvashi #gungunupreti

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7/28/2019
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ramdharisinghdinkar To get the full value of joy you must have someone to divide it with.

Mark Twain

#Beautifulsunday
#booklovers 
#eduardogaleano #ramdharisinghdinkar

To get the full value of joy you must have someone to divide it with. Mark Twain #Beautifulsunday #booklovers #eduardogaleano #ramdharisinghdinkar

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7/28/2019
25
ramdharisinghdinkar कविवर रामधारी सिंह दिनकर :) कितना सरल, कितना सीधा लेखन :) #वीररस #ramdharisinghdinkar

कविवर रामधारी सिंह दिनकर :) कितना सरल, कितना सीधा लेखन :) #वीररस #ramdharisinghdinkar

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7/27/2019
87
ramdharisinghdinkar अनल - 	आग
किरीट - 	मुकुट
भाल - 	ललाट
कालकूट - 	विष
सुधा - 	अमृत
तृषा - 	प्यास

अनल-किरीट

लेना अनल-किरीट भाल पर ओ आशिक होनेवाले !
कालकूट पहले पी लेना, सुधा बीज बोनेवाले !

पड़ी समय से होड़, खींच मत तलवों से कांटे रुककर,
फूंक-फूंक चलती न जवानी चोटों से बचकर , झुककर।

नींद कहाँ उनकी आँखों में जो धुन के मतवाले हैं ?
गति की तृषा और बढती, पड़ते पग में जब छले हैं। जागरूक की जाय निश्चित है, हार चुके सोने वाले,
लेना अनल-किरीट भाल पर ओ आशिक होनेवाले। जिन्हें देखकर डोल गयी हिम्मत दिलेर मर्दानों की 
उन मौजों पर चली जा रही किश्ती कुछ दीवानों की। बेफिक्री का समाँ कि तूफाँ में भी एक तराना है,
दांतों उँगली धरे खड़ा अचरज से भरा ज़माना है। अभय बैठ ज्वालामुखियों पर अपना मन्त्र जगाते हैं।
ये हैं वे, जिनके जादू पानी में आग लगाते हैं। रूह जरा पहचान रखें इनकी जादू टोनेवाले,
लेना अनल-किरीट भाल पर ओ आशिक होनेवाले। संभले जग, खिलवाड़ नहीं अच्छा चढ़ते-से पानी से,
याद हिमालय को, भिड़ना कितना है कठिन जवानी से। ओ मदहोश ! बुरा फल हल शूरों के शोणित पीने का,
देना होगा तुम्हें एक दिन गिन-गिन मोल पसीने का ।

कल होगा इन्साफ, यहाँ किसने क्या किस्मत पायी है,
अभी नींद से जाग रहा युग, यह पहली अंगडाई है। मंजिल दूर नहीं अपनी दुख का बोझा ढोनेवाले
लेना अनल-किरीट भाल पर ओ आशिक होनेवाले। - रामधारी सिंह दिनकर

#ramdharisinghdinkar #hope #freedom #indianfreedomfighter #nationalist

अनल - आग किरीट - मुकुट भाल - ललाट कालकूट - विष सुधा - अमृत तृषा - प्यास अनल-किरीट लेना अनल-किरीट भाल पर ओ आशिक होनेवाले ! कालकूट पहले पी लेना, सुधा बीज बोनेवाले ! पड़ी समय से होड़, खींच मत तलवों से कांटे रुककर, फूंक-फूंक चलती न जवानी चोटों से बचकर , झुककर। नींद कहाँ उनकी आँखों में जो धुन के मतवाले हैं ? गति की तृषा और बढती, पड़ते पग में जब छले हैं। जागरूक की जाय निश्चित है, हार चुके सोने वाले, लेना अनल-किरीट भाल पर ओ आशिक होनेवाले। जिन्हें देखकर डोल गयी हिम्मत दिलेर मर्दानों की  उन मौजों पर चली जा रही किश्ती कुछ दीवानों की। बेफिक्री का समाँ कि तूफाँ में भी एक तराना है, दांतों उँगली धरे खड़ा अचरज से भरा ज़माना है। अभय बैठ ज्वालामुखियों पर अपना मन्त्र जगाते हैं। ये हैं वे, जिनके जादू पानी में आग लगाते हैं। रूह जरा पहचान रखें इनकी जादू टोनेवाले, लेना अनल-किरीट भाल पर ओ आशिक होनेवाले। संभले जग, खिलवाड़ नहीं अच्छा चढ़ते-से पानी से, याद हिमालय को, भिड़ना कितना है कठिन जवानी से। ओ मदहोश ! बुरा फल हल शूरों के शोणित पीने का, देना होगा तुम्हें एक दिन गिन-गिन मोल पसीने का । कल होगा इन्साफ, यहाँ किसने क्या किस्मत पायी है, अभी नींद से जाग रहा युग, यह पहली अंगडाई है। मंजिल दूर नहीं अपनी दुख का बोझा ढोनेवाले लेना अनल-किरीट भाल पर ओ आशिक होनेवाले। - रामधारी सिंह दिनकर #ramdharisinghdinkar #hope #freedom #indianfreedomfighter #nationalist

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7/27/2019
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ramdharisinghdinkar #blubworldrefers
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Rashmirathi by Ramdhari Singh Dinkar
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Rashmirathi is the creation by a freedom fighter and a former Member of Parliament, a Sahitya Akademi awardee, our beloved Rashtra Kavi, Shri Ramdhari Singh Dinkar.
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This book is a poetic journey into the turbulent life and times of Karna, the dejected child of Kunti. He was the son of Lord Sun. This epic in its own terms elaborates the righteous behavior and very high moral values that were followed by this great hero throughout his life, even when he himself had to face the worst societal taboos during his childhood. He is a perfect example of sacrifice, morality, courage, diligence, loyalty, empathy and above all kindness and deep love for every drop of positivity.
.
This whole book is a single poem divided into chapters talking about the life of Karna. It is considered one of the most interesting and engaging interpretation of the Mahabharata, the longest epic in the world. .
Click to read the complete article:
.
https://www.facebook.com/blubworld/photos/a.2320121821570199/2334093233506391/?type=3&theater
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#blubworldrefers #blubworld #ideas #suggestions #opinions #teenmagazine #india #childrenofblubworld #inspiringchildren #indianchildren #parents #children #schoolchildren #teenagers #goodread #interestingcontent #millennials #inspiringcontent #valueeducation #wisdom #rashmirathi #ramdharisinghdinkar #indiannationalpoet #mahabharatha #karna

#blubworldrefers . Rashmirathi by Ramdhari Singh Dinkar . Rashmirathi is the creation by a freedom fighter and a former Member of Parliament, a Sahitya Akademi awardee, our beloved Rashtra Kavi, Shri Ramdhari Singh Dinkar. . This book is a poetic journey into the turbulent life and times of Karna, the dejected child of Kunti. He was the son of Lord Sun. This epic in its own terms elaborates the righteous behavior and very high moral values that were followed by this great hero throughout his life, even when he himself had to face the worst societal taboos during his childhood. He is a perfect example of sacrifice, morality, courage, diligence, loyalty, empathy and above all kindness and deep love for every drop of positivity. . This whole book is a single poem divided into chapters talking about the life of Karna. It is considered one of the most interesting and engaging interpretation of the Mahabharata, the longest epic in the world. . Click to read the complete article: . https://www.facebook.com/blubworld/photos/a.2320121821570199/2334093233506391/?type=3&theater . #blubworldrefers #blubworld #ideas #suggestions #opinions #teenmagazine #india #childrenofblubworld #inspiringchildren #indianchildren #parents #children #schoolchildren #teenagers #goodread #interestingcontent #millennials #inspiringcontent #valueeducation #wisdom #rashmirathi #ramdharisinghdinkar #indiannationalpoet #mahabharatha #karna

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7/26/2019
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ramdharisinghdinkar #RamdhariSinghDinkar
https://goo.gl/RqhE9H

#RamdhariSinghDinkar https://goo.gl/RqhE9H

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7/26/2019
4
ramdharisinghdinkar हिमा दास को बहुत बधाई! शुभकामनाएं! #himadas #pratyancha #trackandfield #gold #himadasgoldmedal #himadasgold #ramdharisinghdinkar #hindipoetry

हिमा दास को बहुत बधाई! शुभकामनाएं! #himadas #pratyancha #trackandfield #gold #himadasgoldmedal #himadasgold #ramdharisinghdinkar #hindipoetry

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7/24/2019
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ramdharisinghdinkar राष्ट्र कवि रामधारी सिंह 'दिनकर'  जी की श्रेष्ठ रचना 'रश्मिरथी' से 
#ramdharisinghdinkar #aabshar #ruuhaaniyt #rekhta #rekhtafoundation #jashnerekhta #hindi #hindipoem #hindipoetry #sadpoetry #imageshayari #images #urdupoetry #urdu #urdupoetryworld #poetryworld #urdupoetrylovers #hindikavita #shayarilove #shayrilover #gazal #hindigazal #article15 #ayushmaankhurana

राष्ट्र कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' जी की श्रेष्ठ रचना 'रश्मिरथी' से #ramdharisinghdinkar #aabshar #ruuhaaniyt #rekhta #rekhtafoundation #jashnerekhta #hindi #hindipoem #hindipoetry #sadpoetry #imageshayari #images #urdupoetry #urdu #urdupoetryworld #poetryworld #urdupoetrylovers #hindikavita #shayarilove #shayrilover #gazal #hindigazal #article15 #ayushmaankhurana

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7/20/2019
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ramdharisinghdinkar #ramdharisinghdinkar

#ramdharisinghdinkar

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7/18/2019
8
ramdharisinghdinkar Recently I have visited a famous book chain store in Mumbai named #Crossword, and asked for famous book #Madhushala by #HariharivanshRaiBachchan, #Rashmirathi by #ramdharisinghdinkar and #Godan by #munshipremchand. I am shocked to hear that they are not selling any Hindi Novel. Does the English language has so engrossed in our country, that we have not even finding the good Hindi books stores in the Hindi Nation (Bharat).
Thanks to #Amazon for making all books available. My humble request to all friends please go through these books you will definitely see a different perspective towards life.

Recently I have visited a famous book chain store in Mumbai named #Crossword, and asked for famous book #Madhushala by #HariharivanshRaiBachchan, #Rashmirathi by #ramdharisinghdinkar and #Godan by #munshipremchand. I am shocked to hear that they are not selling any Hindi Novel. Does the English language has so engrossed in our country, that we have not even finding the good Hindi books stores in the Hindi Nation (Bharat). Thanks to #Amazon for making all books available. My humble request to all friends please go through these books you will definitely see a different perspective towards life.

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7/11/2019
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ramdharisinghdinkar ऊपर सिर पर कनक-छत्र,
भीतर काले-के-काले,
शरमाते हैं नहीं जगत् में जाति पूछनेवाले। #रामधारी_सिंह_दिनकर #ramdharisinghdinkar

#shayerilovers #shayariquotes #sher #poet #poetsofinstagram #poems #poetry ##rekhtafoundation #rekhta #lovequotes #hindikavita #hindi #urdu #urdupoetry #urdusadpoetry #mushaira #ghazal #nazm #ishqbaaz #instashayari

ऊपर सिर पर कनक-छत्र, भीतर काले-के-काले, शरमाते हैं नहीं जगत् में जाति पूछनेवाले। #रामधारी_सिंह_दिनकर #ramdharisinghdinkar #shayerilovers #shayariquotes #sher #poet #poetsofinstagram #poems #poetry ##rekhtafoundation #rekhta #lovequotes #hindikavita #hindi #urdu #urdupoetry #urdusadpoetry #mushaira #ghazal #nazm #ishqbaaz #instashayari

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7/5/2019
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ramdharisinghdinkar साहित्य के सागर की शानदार तस्वीर 
सदी के महानायकों को मेरा दिल से प्रणाम
#hindiwriter, #hindi, #writerscommunity, #writersofinstagram, #writersofig, #storiesofindia, #streetofindia, #urdu #nazm, #yqhindi, #hindisayri, #indianblogger, #spokenword, #spilledink, #readwriteunite, #banaras, #india, #hindikavita, #hindiwriting, #ramdharisinghdinkar,

साहित्य के सागर की शानदार तस्वीर सदी के महानायकों को मेरा दिल से प्रणाम #hindiwriter, #hindi, #writerscommunity, #writersofinstagram, #writersofig, #storiesofindia, #streetofindia, #urdu #nazm, #yqhindi, #hindisayri, #indianblogger, #spokenword, #spilledink, #readwriteunite, #banaras, #india, #hindikavita, #hindiwriting, #ramdharisinghdinkar,

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7/5/2019
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ramdharisinghdinkar महाकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता "याचना नही अब रण होगा) सुनिए @bajpayee.manoj जी की आवाज़ में ।
(Full Video Available on Our Facebook Page)

#manojbajpayee #Poetry #Rekhta #ramdharisinghdinkar #dinkar #Hindipoetry #bollywood #recitepoetry #Shayri #Hindi

महाकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता "याचना नही अब रण होगा) सुनिए @bajpayee.manoj जी की आवाज़ में । (Full Video Available on Our Facebook Page) #manojbajpayee #Poetry #Rekhta #ramdharisinghdinkar #dinkar #Hindipoetry #bollywood #recitepoetry #Shayri #Hindi

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7/5/2019
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ramdharisinghdinkar @ramdharidinkar  के कविता में जीवन का वर्णन अद्भुत है... छोटी-छोटी खुशियों के क्षण निकल जाते हैं रोज जहां फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं...नित जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अंतर्मन तब सुख के मीले समंदर का रह जाता कोई अर्थ नहीं...मन कटुवाणी से आहत हो भीतर तक छलनी हो जाये फिर बाद कहे प्रिय वचनों का रह जाता कोई अर्थ नहीं...
#poems #ratrakavi #ramdharisinghdinkar

@ramdharidinkar के कविता में जीवन का वर्णन अद्भुत है... छोटी-छोटी खुशियों के क्षण निकल जाते हैं रोज जहां फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं...नित जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अंतर्मन तब सुख के मीले समंदर का रह जाता कोई अर्थ नहीं...मन कटुवाणी से आहत हो भीतर तक छलनी हो जाये फिर बाद कहे प्रिय वचनों का रह जाता कोई अर्थ नहीं... #poems #ratrakavi #ramdharisinghdinkar

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7/3/2019
30
ramdharisinghdinkar बेजान, यन्त्र-विरचित गूँगी,
मूर्त्तियाँ एक दिन बोलेंगी,
मुँह खोल-खोल सब के भीतर
शिल्पी! तू जीभ बिठाता चल।
- दिनकर 
#ramdharisinghdinkar #dinkar #hindikavi #hindikavita #hindisahitya #hindipoetrywriter #hindipoetrywriting #hindipoetrylover #hindiwritinglove #hindiwritingcommunity #hindipoetscommunity #hindipoetsoninstagram #hindipanktiyaan #hindigeet #parichaybhasha

बेजान, यन्त्र-विरचित गूँगी, मूर्त्तियाँ एक दिन बोलेंगी, मुँह खोल-खोल सब के भीतर शिल्पी! तू जीभ बिठाता चल। - दिनकर #ramdharisinghdinkar #dinkar #hindikavi #hindikavita #hindisahitya #hindipoetrywriter #hindipoetrywriting #hindipoetrylover #hindiwritinglove #hindiwritingcommunity #hindipoetscommunity #hindipoetsoninstagram #hindipanktiyaan #hindigeet #parichaybhasha

7
7/1/2019
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ramdharisinghdinkar शब्द जब मिलते नहीं मन के,
प्रेम तब इंगित दिखाता है,
बोलने में लाज जब लगती,
प्रेम तब लिखना सिखाता है। - रामधारी सिंह " दिनकर " 
#ramdharisinghdinkar
#hindikavi #hindikavita #hindikavitasrajan #hindipoetrywriting #hindipoetrylover #hindipoetryslam #hindipoetrycommunity #hindiwordporn #hindisahitya #hindikikavita #hindilekhakdotcom #hindibhashipoetsofinstagram #hindiliterature #hindiliteraturelover #parichaybhasha

शब्द जब मिलते नहीं मन के, प्रेम तब इंगित दिखाता है, बोलने में लाज जब लगती, प्रेम तब लिखना सिखाता है। - रामधारी सिंह " दिनकर " #ramdharisinghdinkar #hindikavi #hindikavita #hindikavitasrajan #hindipoetrywriting #hindipoetrylover #hindipoetryslam #hindipoetrycommunity #hindiwordporn #hindisahitya #hindikikavita #hindilekhakdotcom #hindibhashipoetsofinstagram #hindiliterature #hindiliteraturelover #parichaybhasha

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6/29/2019
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ramdharisinghdinkar ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो ,
किसने कहा, युद्ध की वेला चली गयी, शांति से बोलो?
Shri #ramdharisinghdinkar 
@anjumanef @themoonshineprojecthyd #anjumanef
P.c. @priyabehlp

ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो , किसने कहा, युद्ध की वेला चली गयी, शांति से बोलो? Shri #ramdharisinghdinkar @anjumanef @themoonshineprojecthyd #anjumanef P.c. @priyabehlp

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6/19/2019
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ramdharisinghdinkar गरदन पर किसका पाप वीर ! ढोते हो ?
शोणित से तुम किसका कलंक धोते हो ?
#ramdharisinghdinkar ☺️☺️☺️☺️☺️☺️☺️

गरदन पर किसका पाप वीर ! ढोते हो ? शोणित से तुम किसका कलंक धोते हो ? #ramdharisinghdinkar ☺️☺️☺️☺️☺️☺️☺️

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6/17/2019
43
ramdharisinghdinkar वनिता की ममता न हुई,
सुत का न मुझे कुछ छोह हुआ,
ख्याति, सुयश, सम्मान, विभव का,
त्यों ही, कभी न मोह हुआ।
जीवन की क्या चहल-पहल है, इसे न मैने पहचाना,
सेनापति के एक इशारे पर मिटना केवल जाना। मसि की तो क्या बात?
गली की ठिकरी मुझे भुलाती है,
जीते जी लड़ मरूं, मरे पर याद किसे फिर आती है?
इतिहासों में अमर रहूँ, है एसी मृत्यु नहीं मेरी,
विश्व छोड़ जब चला, भुलाते लगती फिर किसको देरी? ~ रामधारी सिंह दिनकर

#ramdharisinghdinkar #amritsar
#punjab #india #indiantraveller

वनिता की ममता न हुई, सुत का न मुझे कुछ छोह हुआ, ख्याति, सुयश, सम्मान, विभव का, त्यों ही, कभी न मोह हुआ। जीवन की क्या चहल-पहल है, इसे न मैने पहचाना, सेनापति के एक इशारे पर मिटना केवल जाना। मसि की तो क्या बात? गली की ठिकरी मुझे भुलाती है, जीते जी लड़ मरूं, मरे पर याद किसे फिर आती है? इतिहासों में अमर रहूँ, है एसी मृत्यु नहीं मेरी, विश्व छोड़ जब चला, भुलाते लगती फिर किसको देरी? ~ रामधारी सिंह दिनकर #ramdharisinghdinkar #amritsar #punjab #india #indiantraveller

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6/16/2019
40
ramdharisinghdinkar दो में से क्या तुम्हें चाहिए कलम या कि तलवार...
#RamdhariSinghDinkar #SaturdayThoughts #AnugyaPatra

दो में से क्या तुम्हें चाहिए कलम या कि तलवार... #RamdhariSinghDinkar #SaturdayThoughts #AnugyaPatra

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6/14/2019
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ramdharisinghdinkar राष्ट्रकवी- रामधारी सिंह दिनकर (कर्ण का महादान)
 #रश्मिरथी
#ramdharisinghdinkar

राष्ट्रकवी- रामधारी सिंह दिनकर (कर्ण का महादान) #रश्मिरथी #ramdharisinghdinkar

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6/12/2019
30
ramdharisinghdinkar यह देख, गगन मुझमें लय है,
यह देख, पवन मुझमें लय है,
मुझमें विलीन झंकार सकल,
मुझमें लय है संसार सकल।
अमरत्व फूलता है मुझमें,
संहार झूलता है मुझमें।
जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे। ~ रश्मिरथी, रामधारी सिंह दिनकर

Rashmirathi, Ramdhari Singh Dinkar 
I can’t explain how much I love this book. Best ever work of Hindi literature. 
#hindiliterature #hindilove #rashmirathi #ramdharisinghdinkar #hindipoetry #hindipoetrylove #karna #krishna #mahabharata #loveformahabharat #mahabharatlovers #classicliterature #literaturelove #bookgram #poems #poemslove #krishnalove ❤️❤️

यह देख, गगन मुझमें लय है, यह देख, पवन मुझमें लय है, मुझमें विलीन झंकार सकल, मुझमें लय है संसार सकल। अमरत्व फूलता है मुझमें, संहार झूलता है मुझमें। जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे। ~ रश्मिरथी, रामधारी सिंह दिनकर Rashmirathi, Ramdhari Singh Dinkar I can’t explain how much I love this book. Best ever work of Hindi literature. #hindiliterature #hindilove #rashmirathi #ramdharisinghdinkar #hindipoetry #hindipoetrylove #karna #krishna #mahabharata #loveformahabharat #mahabharatlovers #classicliterature #literaturelove #bookgram #poems #poemslove #krishnalove ❤️❤️

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6/12/2019
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ramdharisinghdinkar जिन दिनों 'कुरुक्षेत्र' काव्य की रचना हो रही थी, उसी आस पास हिरोशिमा-नागासाकी पर पहले-पहल विस्फोट हुआ था। विज्ञान को स्मृति के पार फेंक देने की सलाह उस समय घबराहट में दी गई सलाह मानी गई थी। किंतु आज विश्व बर के चिंतक इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि सृष्टि के सारे रहस्य कदाचित जानने योग्य नहीं हैं। आज यह सोचा जा रहा है कि संसार को मिलकर कोई ऐसा कानून बनाना चाहिए जो विज्ञान को ऐसे आविष्कारों की ओर जाने से रोक सके,जिन्हें नियंत्रण में रखने की नैतिक शक्ति मनुष्य के पास नहीं है।
*
यह वैश्विक अभियान कितनी विषमताओं से भरा है, सफल होगा या नहीं, यह न हम जानते हैं न आप। किंतु यह अवश्य है कि भीषण मानव-निर्मित आपदाओं के बाद उस विज्ञान को नीति की मर्यादा में बाँधने की चर्चा आरंभ हुई है, जिसे बहुत समय तक निर्बाध रखना बेहतर समझा गया।
*
पढ़िए विज्ञान के ध्येय को मनुष्यता के ध्येय से जोड़ती कवि की चेतावनी, छठे सर्ग के अंतिम भाग में ~
~~~~~
~~~~~
दिव्य भावों के जगत में जागरण का गान,
मानवों का श्रेय आत्मा का किरण-अभियान ।
यजन अर्पण, आत्मसुख का त्याग,
श्रेय मानव का तपस्या की दहकती आग ।
●
बुद्धि-मंथन से विनिगत श्रेय वह नवनीत,
जो करे नर के हृदय को स्निग्ध, सौम्य, पुनीत ।
श्रेय वह विज्ञान का वरदान,
हो सुलभ सबको सहज जिसका रुचिर अवदान ।
●
श्रेय वह नर-बुद्धि का शिवरूप आविष्कार,
ढो सके जिससे प्रकृति सबके सुखों का भार ।
मनुज के श्रम के अपव्यय की प्रथा रुक जाये,
सुख-समृद्धि-विधान में नर के प्रकृति झुक जाये ।
●
श्रेय होगा मनुज का समता-विधायक ज्ञान,
स्नेह-सिंचित न्याय पर नव विश्व का निर्माण ।
एक नर में अन्य का नि:शंक, दृढ़ विश्वास,
धर्म दीप्त मनुष्य का उज्ज्वल नया इतिहास-
●
समर, शोषण, ह्रास की विरुदावली से हीन,
पृष्ठ जिसका एक भी होगा न दग्ध, मलिन ।
मनुज का इतिहास, जो होगा सुधामय कोष,
छलकता होगा सभी नर का जहां संतोष ।
●
युद्ध की ज्वर-भीति से हो मुक्त,
जब कि होगी, सत्य ही, वसुधा सुधा से युक्त ।
श्रेय होगा सुष्ठु-विकसित मनुज का यह काल,
जब नहीं होगी धरा नर के रुधिर से लाल ।
●
श्रेय होगा धर्म का आलोक वह निर्बन्ध,
मनुज जोड़ेगा मनुज से जब उचित संबंध ।
साम्य की वह रश्मि- स्निग्ध, उदार,
कब खिलेगी, कब खिलेगी विश्व में भगवान ?
कब सुकोमल ज्योति से अभिसिक्त
हो सरस होंगे जली-सूखी रसा के प्राण ?
◆◆◆◆◆
~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~
【सर्ग समाप्त】
#ramdharisinghdinkar
#dinkar
#kurukshetra
#hindipoetry
#hindikavita

जिन दिनों 'कुरुक्षेत्र' काव्य की रचना हो रही थी, उसी आस पास हिरोशिमा-नागासाकी पर पहले-पहल विस्फोट हुआ था। विज्ञान को स्मृति के पार फेंक देने की सलाह उस समय घबराहट में दी गई सलाह मानी गई थी। किंतु आज विश्व बर के चिंतक इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि सृष्टि के सारे रहस्य कदाचित जानने योग्य नहीं हैं। आज यह सोचा जा रहा है कि संसार को मिलकर कोई ऐसा कानून बनाना चाहिए जो विज्ञान को ऐसे आविष्कारों की ओर जाने से रोक सके,जिन्हें नियंत्रण में रखने की नैतिक शक्ति मनुष्य के पास नहीं है। * यह वैश्विक अभियान कितनी विषमताओं से भरा है, सफल होगा या नहीं, यह न हम जानते हैं न आप। किंतु यह अवश्य है कि भीषण मानव-निर्मित आपदाओं के बाद उस विज्ञान को नीति की मर्यादा में बाँधने की चर्चा आरंभ हुई है, जिसे बहुत समय तक निर्बाध रखना बेहतर समझा गया। * पढ़िए विज्ञान के ध्येय को मनुष्यता के ध्येय से जोड़ती कवि की चेतावनी, छठे सर्ग के अंतिम भाग में ~ ~~~~~ ~~~~~ दिव्य भावों के जगत में जागरण का गान, मानवों का श्रेय आत्मा का किरण-अभियान । यजन अर्पण, आत्मसुख का त्याग, श्रेय मानव का तपस्या की दहकती आग । ● बुद्धि-मंथन से विनिगत श्रेय वह नवनीत, जो करे नर के हृदय को स्निग्ध, सौम्य, पुनीत । श्रेय वह विज्ञान का वरदान, हो सुलभ सबको सहज जिसका रुचिर अवदान । ● श्रेय वह नर-बुद्धि का शिवरूप आविष्कार, ढो सके जिससे प्रकृति सबके सुखों का भार । मनुज के श्रम के अपव्यय की प्रथा रुक जाये, सुख-समृद्धि-विधान में नर के प्रकृति झुक जाये । ● श्रेय होगा मनुज का समता-विधायक ज्ञान, स्नेह-सिंचित न्याय पर नव विश्व का निर्माण । एक नर में अन्य का नि:शंक, दृढ़ विश्वास, धर्म दीप्त मनुष्य का उज्ज्वल नया इतिहास- ● समर, शोषण, ह्रास की विरुदावली से हीन, पृष्ठ जिसका एक भी होगा न दग्ध, मलिन । मनुज का इतिहास, जो होगा सुधामय कोष, छलकता होगा सभी नर का जहां संतोष । ● युद्ध की ज्वर-भीति से हो मुक्त, जब कि होगी, सत्य ही, वसुधा सुधा से युक्त । श्रेय होगा सुष्ठु-विकसित मनुज का यह काल, जब नहीं होगी धरा नर के रुधिर से लाल । ● श्रेय होगा धर्म का आलोक वह निर्बन्ध, मनुज जोड़ेगा मनुज से जब उचित संबंध । साम्य की वह रश्मि- स्निग्ध, उदार, कब खिलेगी, कब खिलेगी विश्व में भगवान ? कब सुकोमल ज्योति से अभिसिक्त हो सरस होंगे जली-सूखी रसा के प्राण ? ◆◆◆◆◆ ~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~ 【सर्ग समाप्त】 #ramdharisinghdinkar #dinkar #kurukshetra #hindipoetry #hindikavita

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6/11/2019
30
ramdharisinghdinkar दिनकर कहते हैं - "अधिक आवश्यक क्या है? मनुष्य के ज्ञान में वृद्धि या उसके आचरण में सुधार? आदमी का ज़्यादा जानना या उसका भली ज़िंदगी बसर करना? जिन आविष्कारों से मनुष्य की शांति खतरे में पड़ती है, वे आविष्कार मात्र बुद्धि की आतिशबाज़ी के खेल हैं, उनसे मानव जाति के गौरव में तनिक भी वृद्धि नहीं होगी।"
*
सत्य है, मनुष्यता के इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान मात्र उन आविष्कारों का होगा जिनकी उत्पत्ति में मानसिक गुणों के साथ हार्दिक गुणों (दया, मैत्री, त्याग, परोपकार) का भी हाथ हो। दिनकर के शब्दों में कहें तो-
"श्रेय उसका बुद्धि पर चैतन्य उर की जीत;
श्रेय मानव की असीमित मानवों से प्रीत। "
*
पढ़िए बुद्धि के ऊपर हृदय के अधिपत्य की आवश्यकता का वर्णन, छठे सर्ग के इस भाग में ~
~~~~~
~~~~~
श्रेय उसका बुद्धि पर चैतन्य उर की जीत;
श्रेय मानव की असीमित मानवों से प्रीत;
एक नर से दूसरे के बीच का व्यवधान
तोड़ दे जो, है वही ज्ञानी, वही विद्वान ।
●
और मानव भी वही, जो जीव बुद्धि-अधीर
तोड़ना अणु ही, न इस व्यवधान का प्राचीर;
वह नहीं मानव; मनुज से उच्च, लघु या भिन्न
चित्र-प्राणी है किसी अज्ञात ग्रह का छिन्न ।
●
स्यात, मंगल या शनिश्चर लोक का अवदान
अजनबी करता सदा अपने ग्रहों का ध्यान ।
रसवती भू के मनुज का श्रेय
यह नहीं विज्ञान, विद्या-बुद्धि यह आग्नेय;
●
विश्व-दाहक, मृत्यु-वाहक, सृष्टि का संताप,
भ्रांत पाठ पर अंध बढ़ते ज्ञान का अभिशाप ।
भ्रमित प्रज्ञा का कौतुक यह इन्द्र जाल विचित्र,
श्रेय मानव के न आविष्कार ये अपवित्र ।
●
सावधान, मनुष्य! यदि विज्ञान है तलवार,
तो इसे दे फेंक, तज कर मोह, स्मृति के पार ।
हो चुका है सिद्ध, है तू शिशु अभी नादान;
फूल-काँटों की तुझे कुछ भी नहीं पहचान ।
●
खेल सकता तू नहीं ले हाथ में तलवार;
काट लेगा अंग, तीखी है बड़ी यह धार ।
रसवती भू के मनुज का श्रेय,
यह नहीं विज्ञान कटु, आग्नेय ।
●
श्रेय उसका प्राण में बहती प्रणय की वायु,
मानवों के हेतु अर्पित मानवों की आयु ।
श्रेय उसका आंसुओं की धार,
श्रेय उसका भग्न वीणा की अधीर पुकार ।
◆◆◆◆◆
~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~
(क्रमशः अगली पोस्ट में..)
#ramdharisinghdinkar
#dinkar
#kurukshetra
#hindipoetry
#hindikavita

दिनकर कहते हैं - "अधिक आवश्यक क्या है? मनुष्य के ज्ञान में वृद्धि या उसके आचरण में सुधार? आदमी का ज़्यादा जानना या उसका भली ज़िंदगी बसर करना? जिन आविष्कारों से मनुष्य की शांति खतरे में पड़ती है, वे आविष्कार मात्र बुद्धि की आतिशबाज़ी के खेल हैं, उनसे मानव जाति के गौरव में तनिक भी वृद्धि नहीं होगी।" * सत्य है, मनुष्यता के इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान मात्र उन आविष्कारों का होगा जिनकी उत्पत्ति में मानसिक गुणों के साथ हार्दिक गुणों (दया, मैत्री, त्याग, परोपकार) का भी हाथ हो। दिनकर के शब्दों में कहें तो- "श्रेय उसका बुद्धि पर चैतन्य उर की जीत; श्रेय मानव की असीमित मानवों से प्रीत। " * पढ़िए बुद्धि के ऊपर हृदय के अधिपत्य की आवश्यकता का वर्णन, छठे सर्ग के इस भाग में ~ ~~~~~ ~~~~~ श्रेय उसका बुद्धि पर चैतन्य उर की जीत; श्रेय मानव की असीमित मानवों से प्रीत; एक नर से दूसरे के बीच का व्यवधान तोड़ दे जो, है वही ज्ञानी, वही विद्वान । ● और मानव भी वही, जो जीव बुद्धि-अधीर तोड़ना अणु ही, न इस व्यवधान का प्राचीर; वह नहीं मानव; मनुज से उच्च, लघु या भिन्न चित्र-प्राणी है किसी अज्ञात ग्रह का छिन्न । ● स्यात, मंगल या शनिश्चर लोक का अवदान अजनबी करता सदा अपने ग्रहों का ध्यान । रसवती भू के मनुज का श्रेय यह नहीं विज्ञान, विद्या-बुद्धि यह आग्नेय; ● विश्व-दाहक, मृत्यु-वाहक, सृष्टि का संताप, भ्रांत पाठ पर अंध बढ़ते ज्ञान का अभिशाप । भ्रमित प्रज्ञा का कौतुक यह इन्द्र जाल विचित्र, श्रेय मानव के न आविष्कार ये अपवित्र । ● सावधान, मनुष्य! यदि विज्ञान है तलवार, तो इसे दे फेंक, तज कर मोह, स्मृति के पार । हो चुका है सिद्ध, है तू शिशु अभी नादान; फूल-काँटों की तुझे कुछ भी नहीं पहचान । ● खेल सकता तू नहीं ले हाथ में तलवार; काट लेगा अंग, तीखी है बड़ी यह धार । रसवती भू के मनुज का श्रेय, यह नहीं विज्ञान कटु, आग्नेय । ● श्रेय उसका प्राण में बहती प्रणय की वायु, मानवों के हेतु अर्पित मानवों की आयु । श्रेय उसका आंसुओं की धार, श्रेय उसका भग्न वीणा की अधीर पुकार । ◆◆◆◆◆ ~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~ (क्रमशः अगली पोस्ट में..) #ramdharisinghdinkar #dinkar #kurukshetra #hindipoetry #hindikavita

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6/10/2019
28
ramdharisinghdinkar प्रकृति के तत्वों पर विजय प्राप्त करने की मनुष्य की इच्छा का कोई अंत नहीं। हर विजय के साथ ही संसार के हर आयाम पर अपना अधिपत्य स्थापित करने की उसकी लालसा बढ़ती जाती है। मगर बुद्धि की दिशा का निर्धारण चरित्र ही करता है। चरित्र के पतन के कारण मनुष्य को धिक्कारते हुए दिनकर कहते हैं -
"यह मनुज ज्ञानी, शृगालों, कुक्कुरों से हीन
हो, किया करता अनेकों क्रूर कर्म मलीन।."
और ऐसे मनुष्य का स्पर्श पाते ही विज्ञान भी अपना कल्याणकारी उद्देश्य छोड़कर ध्वंस की दिशा में चल पड़ता है।
*
पढ़िए विज्ञान को मात्र अपनी लालसा और दूसरों के विनाश के लिए प्रयोग करते मनुष्य को धिक्कारते कवि का नाद, छठे सर्ग के इस भाग में ~
~~~~~
~~~~~
घुट रही नर-बुद्धि की है सांस;
चाहती वह कुछ बड़ा जग, कुछ बड़ा आकाश ।
यह मनुज जिसके लिए लघु हो रहा भूगोल
अपर-ग्रह-जय की तृषा जिसमें उठी है बोल ।
●
यह मनुज विज्ञान में निष्णात,
जो करेगा, स्यात, मंगल और विधु से बात ।
यह मनुज ब्रह्मांड का सबसे सुरम्य प्रकाश,
कुछ छिपा सकते न जिससे भूमि या आकाश ।
●
यह मनुज जिसकी शिखा उद्दाम;
कर रहे जिसको चराचर भक्तियुक्त प्रणाम ।
यह मनुज, जो सृष्टि का श्रृंगार;
ज्ञान का, विज्ञान का, आलोक का आगार ।
●
पर सको सुन तो सुनो, मंगल-जगत के लोग !
तुम्हें छूने को रहा जो जीव कर उद्योग-
वह अभी पशु है; निरा पशु, हिंस्र, रक्त पिपासु,
बुद्धि उसकी दानवी है स्थूल की जिज्ञासु ।
●
कड़कता उसमें किसी का जब कभी अभिमान,
फूंकने लगते सभी हो मत्त मृत्यु-विषाण ।
●
यह मनुज ज्ञानी, शृगालों, कुक्कुरों से हीन
हो, किया करता अनेकों क्रूर कर्म मलीन ।
●
देह ही लड़ती नहीं, हैं जूझते मन-प्राण,
साथ होते ध्वंस में इसके कला-विज्ञान ।
इस मनुज के हाथ से विज्ञान के भी फूल,
वज्र हो कर छूटते शुभ धर्म अपना भूल ।
●
यह मनुज, जो ज्ञान का आगार !
यह मनुज, जो सृष्टि का श्रृंगार !
नाम सुन भूलो नहीं, सोचो विचारो कृत्य;
यह मनुज, संहार सेवी वासना का भृत्य ।
●
छद्म इसकी कल्पना, पाषण्ड इसका ज्ञान,
यह मनुष्य मनुष्यता का घोरतम अपमान ।
व्योम से पाताल तक सब कुछ इसे है ज्ञेय,
पर, न यह परिचित मनुज का, यह न उसका श्रेय ।
◆◆◆◆◆
~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~
(क्रमशः अगली पोस्ट में..)
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#hindikavita

प्रकृति के तत्वों पर विजय प्राप्त करने की मनुष्य की इच्छा का कोई अंत नहीं। हर विजय के साथ ही संसार के हर आयाम पर अपना अधिपत्य स्थापित करने की उसकी लालसा बढ़ती जाती है। मगर बुद्धि की दिशा का निर्धारण चरित्र ही करता है। चरित्र के पतन के कारण मनुष्य को धिक्कारते हुए दिनकर कहते हैं - "यह मनुज ज्ञानी, शृगालों, कुक्कुरों से हीन हो, किया करता अनेकों क्रूर कर्म मलीन।." और ऐसे मनुष्य का स्पर्श पाते ही विज्ञान भी अपना कल्याणकारी उद्देश्य छोड़कर ध्वंस की दिशा में चल पड़ता है। * पढ़िए विज्ञान को मात्र अपनी लालसा और दूसरों के विनाश के लिए प्रयोग करते मनुष्य को धिक्कारते कवि का नाद, छठे सर्ग के इस भाग में ~ ~~~~~ ~~~~~ घुट रही नर-बुद्धि की है सांस; चाहती वह कुछ बड़ा जग, कुछ बड़ा आकाश । यह मनुज जिसके लिए लघु हो रहा भूगोल अपर-ग्रह-जय की तृषा जिसमें उठी है बोल । ● यह मनुज विज्ञान में निष्णात, जो करेगा, स्यात, मंगल और विधु से बात । यह मनुज ब्रह्मांड का सबसे सुरम्य प्रकाश, कुछ छिपा सकते न जिससे भूमि या आकाश । ● यह मनुज जिसकी शिखा उद्दाम; कर रहे जिसको चराचर भक्तियुक्त प्रणाम । यह मनुज, जो सृष्टि का श्रृंगार; ज्ञान का, विज्ञान का, आलोक का आगार । ● पर सको सुन तो सुनो, मंगल-जगत के लोग ! तुम्हें छूने को रहा जो जीव कर उद्योग- वह अभी पशु है; निरा पशु, हिंस्र, रक्त पिपासु, बुद्धि उसकी दानवी है स्थूल की जिज्ञासु । ● कड़कता उसमें किसी का जब कभी अभिमान, फूंकने लगते सभी हो मत्त मृत्यु-विषाण । ● यह मनुज ज्ञानी, शृगालों, कुक्कुरों से हीन हो, किया करता अनेकों क्रूर कर्म मलीन । ● देह ही लड़ती नहीं, हैं जूझते मन-प्राण, साथ होते ध्वंस में इसके कला-विज्ञान । इस मनुज के हाथ से विज्ञान के भी फूल, वज्र हो कर छूटते शुभ धर्म अपना भूल । ● यह मनुज, जो ज्ञान का आगार ! यह मनुज, जो सृष्टि का श्रृंगार ! नाम सुन भूलो नहीं, सोचो विचारो कृत्य; यह मनुज, संहार सेवी वासना का भृत्य । ● छद्म इसकी कल्पना, पाषण्ड इसका ज्ञान, यह मनुष्य मनुष्यता का घोरतम अपमान । व्योम से पाताल तक सब कुछ इसे है ज्ञेय, पर, न यह परिचित मनुज का, यह न उसका श्रेय । ◆◆◆◆◆ ~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~ (क्रमशः अगली पोस्ट में..) #ramdharisinghdinkar #dinkar #kurukshetra #hindipoetry #hindikavita

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6/10/2019
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ramdharisinghdinkar भगवान् कुपित होकर बोले-
‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे। - रामधारी सिंह "दिनकर"
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#sidharthcourtwala 
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भगवान् कुपित होकर बोले- ‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे। - रामधारी सिंह "दिनकर" . . . . . . . . . . . . . . . . #sidharthcourtwala #photography #streetphotography #streetphotographer #streetlife #streetislife #lifeisstreet #streetphotographs #streetsofdelhi #streetsofindia #street_photography #street_art #friendsinbw #bnwphotography #streetsoftheworld #streetphotographyindia #storyofthestreets #streetphotographersmagazine #streetphotographs #curiousbeing #throughmylens #cameratales #shotononeplus #lawyerturnedphotographer #hindikavita #ramdharisinghdinkar #rashmirathi #mahabharat #dinkar #delhi #sodelhi

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6/9/2019
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ramdharisinghdinkar जिस सभ्यता में हम जी रहे हैं, उसका एक अभिशाप यह है कि इसकी बुद्धि का जितना विकास होता है, उतना ही इसके हृदय का जल कक्ष होता जाता है। नगरों की जितनी उन्नति होती है, ग्राम उतने ही उपेक्षित होते जाते हैं। होना यह चाहिए कि मनुष्य की मानसिक शक्तियाँ उसके हार्दिक गुणों के अधीन हों। मगर दुर्भाग्यवश स्थिति इसके ठीक विपरीत है। दिनकर कहते हैं ' चेतना का अभियान पशुता से देवत्व की ओर है। किंतु मानव पशु और देव के बीच की कड़ी बनकर अड़ा हुआ है। उसके चरित्र में पाशविक प्रवृत्ति भरी है। *****
पढ़िए बुद्धि की उन्नति के क्रम में चरित्र की अवनति के पथ पर अग्रसर मनुष्य के वास्तविक लक्ष्य पर लगा प्रश्नचिह्न, छठे सर्ग के इस भाग में -
~~~~~
~~~~~
बुद्धि के पवमान में उड़ता हुआ असहाय
जा रहा तू किस दशा की ओर को निरुपाय ?
लक्ष्य क्या ? उद्देश्य क्या? क्या अर्थ ?
यह नहीं यदि ज्ञात, तो विज्ञान का श्रम व्यर्थ ।
●
सुन रहा आकाश चढ़ ग्रह तारकों का नाद;
एक छोटी बात ही पड़ती न तुझको याद ।
एक छोटी, एक सीधी बात,
विश्व में छायी हुर्इ है वासना की रात।
●
वासना की यामिनी, जिसके तिमिर से हार,
हो रहा नर भ्रांत अपना आप ही आहार;
बुद्धि में नभ की सुरभि, तन में रुधिर की कीच,
यह वचन से देवता, पर, कर्म से पशु नीच ।
●
यह मनुज,
जिसका गगन में जा रहा है यान,
काँपते जिसके कारों को देख कर परमाणु ।
खोल कर अपना हृदय गिरि, सिंधु, भू, आकाश
हैं सुना जिसको चुके निज गुह्यतम इतिहास ।
●
खुल गए पर्दे, रहा अब क्या यहाँ अज्ञेय
किन्तु, नर को चाहिए नित विघ्न कुछ दुर्जेय,
सोचने को और करने को नया संघर्ष,
नव्य जय का क्षेत्र पाने को नया उत्कर्ष ।
●
पर धरा सुपरीक्षिता, विशिष्ट, स्वाद-विहीन,
यह पढ़ी पोथी न दे सकती प्रवेग नवीन ।
एक लघु हस्तामलक यह भूमि मण्डल गोल,
मानवों ने पढ़ लिए सब पृष्ठ जिसके खोल ।
●
किन्तु, नर-प्रज्ञा सदा गतिशालिनी उद्दाम,
ले नहीं सकती कहीं रुक एक पल विश्राम ।
●
यह परीक्षित भूमि, यह पोथी पठित, प्राचीन
सोचने को दे उसे अब बात कौन नवीन ?
यह लघु ग्रह भूमिमंडल, व्योम यह संकीर्ण,
चाहिए नर को नया कुछ और जग विस्तीर्ण ।
◆◆◆◆◆
~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~
(क्रमशः अगली पोस्ट में..)
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#dinkar
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#hindipoetry
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जिस सभ्यता में हम जी रहे हैं, उसका एक अभिशाप यह है कि इसकी बुद्धि का जितना विकास होता है, उतना ही इसके हृदय का जल कक्ष होता जाता है। नगरों की जितनी उन्नति होती है, ग्राम उतने ही उपेक्षित होते जाते हैं। होना यह चाहिए कि मनुष्य की मानसिक शक्तियाँ उसके हार्दिक गुणों के अधीन हों। मगर दुर्भाग्यवश स्थिति इसके ठीक विपरीत है। दिनकर कहते हैं ' चेतना का अभियान पशुता से देवत्व की ओर है। किंतु मानव पशु और देव के बीच की कड़ी बनकर अड़ा हुआ है। उसके चरित्र में पाशविक प्रवृत्ति भरी है। ***** पढ़िए बुद्धि की उन्नति के क्रम में चरित्र की अवनति के पथ पर अग्रसर मनुष्य के वास्तविक लक्ष्य पर लगा प्रश्नचिह्न, छठे सर्ग के इस भाग में - ~~~~~ ~~~~~ बुद्धि के पवमान में उड़ता हुआ असहाय जा रहा तू किस दशा की ओर को निरुपाय ? लक्ष्य क्या ? उद्देश्य क्या? क्या अर्थ ? यह नहीं यदि ज्ञात, तो विज्ञान का श्रम व्यर्थ । ● सुन रहा आकाश चढ़ ग्रह तारकों का नाद; एक छोटी बात ही पड़ती न तुझको याद । एक छोटी, एक सीधी बात, विश्व में छायी हुर्इ है वासना की रात। ● वासना की यामिनी, जिसके तिमिर से हार, हो रहा नर भ्रांत अपना आप ही आहार; बुद्धि में नभ की सुरभि, तन में रुधिर की कीच, यह वचन से देवता, पर, कर्म से पशु नीच । ● यह मनुज, जिसका गगन में जा रहा है यान, काँपते जिसके कारों को देख कर परमाणु । खोल कर अपना हृदय गिरि, सिंधु, भू, आकाश हैं सुना जिसको चुके निज गुह्यतम इतिहास । ● खुल गए पर्दे, रहा अब क्या यहाँ अज्ञेय किन्तु, नर को चाहिए नित विघ्न कुछ दुर्जेय, सोचने को और करने को नया संघर्ष, नव्य जय का क्षेत्र पाने को नया उत्कर्ष । ● पर धरा सुपरीक्षिता, विशिष्ट, स्वाद-विहीन, यह पढ़ी पोथी न दे सकती प्रवेग नवीन । एक लघु हस्तामलक यह भूमि मण्डल गोल, मानवों ने पढ़ लिए सब पृष्ठ जिसके खोल । ● किन्तु, नर-प्रज्ञा सदा गतिशालिनी उद्दाम, ले नहीं सकती कहीं रुक एक पल विश्राम । ● यह परीक्षित भूमि, यह पोथी पठित, प्राचीन सोचने को दे उसे अब बात कौन नवीन ? यह लघु ग्रह भूमिमंडल, व्योम यह संकीर्ण, चाहिए नर को नया कुछ और जग विस्तीर्ण । ◆◆◆◆◆ ~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~ (क्रमशः अगली पोस्ट में..) #ramdharisinghdinkar #dinkar #kurukshetra #hindipoetry #hindikavita

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ramdharisinghdinkar https://youtu.be/9lwQjtmTaUY

#krishna #mahabharata #kavita #ramdharisinghdinkar

https://youtu.be/9lwQjtmTaUY #krishna #mahabharata #kavita #ramdharisinghdinkar

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ramdharisinghdinkar दिनकर कहते हैं कि मनुष्य ने विज्ञान की सीढ़ी चढ़कर जो उत्थान किया, वह मात्र बुद्धि तक ही सीमित रहा। किंतु मनुष्य की आत्मा में वास करने वाले देवता बुद्धि ही नहीं, मोम-सा हृदय भी माँगते हैं। शक्ति और सत्ता के संघर्ष से उपजी थकान और कोलाहल से हटकर आत्मा विश्राम और शांति के दो क्षण चाहती है। दो क्षण - स्वयं में लीन होने के लिए, प्रकृति में समाने के लिए, जिन दो क्षणों में व्यक्ति का तन ही नहीं, मन भी भौतिकता की थकान से आराम पा सके।
निरंतर मन को प्रताड़ित कर तन को अथाह कामनाओं की पूर्ति की अग्नि में झोंकता मानव नियति का दास है, और ऐसा दास उपहास का पात्र क्यों न हो?
*
पढ़िए तन की बोई लालसा की फसल काटकर थके मन के विश्राम का उपाय, छठे सर्ग के इस भाग में -
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~~~~~
किन्तु है बढ़ता गया मस्तिष्क ही नि:शेष,
छूट कर पीछे गया है रह हृदय का देश;
नर मनाता नित्य नूतन बुद्धि का त्योहार,
प्राण में करते दुखी हो देवता चीत्कार ।
●
चाहिए उनको न केवल ज्ञान
देवता हैं मांगते कुछ स्नेह, कुछ बलिदान;
मोम-सी कोई मुलायम चीज,
ताप पा कर जो उठे मन में पसीज-पसीज;
●
प्राण के झुलसे विपिन में फूल कुछ सुकुमार;
ज्ञान के मरू में सुकोमल भावना की धार;
चाँदनी की रागिनी, कुछ भोर की मुस्कान;
नींद में भूली हुई बहती नदी का गान;
●
रंग में घुलता हुआ खिलती कली का राज़;
पत्तियों पर गूँजती कुछ ओस की आवाज़;
आंसुओं में दर्द की गलती हुई तस्वीर;
फूल की, रस में बसी-भीगी हुई जंजीर ।
●
धूम, कोलाहल, थकावट धूल के उस पार,
शीतजल से पूर्ण कोई मंदगामी धार;
वृक्ष के नीचे जहां मन को मिले विश्राम,
आदमी काटे जहां कुछ छुट्टियाँ, कुछ शाम ।
●
कर्म-संकुल लोक-जीवन से समय कुछ छीन,
हो जहां पर बैठ नर कुछ पल स्वयं में लीन ।
फूल-सा एकांत में उर खोलने के हेतु
शाम को दिन की कमाई तोलने के हेतु ।
●
ले चुकी सुख-भाग समुचित से अधिक है देह,
देवता हैं मांगते मन के लिए लघु गेह ।
हाय रे मानव ! नियति के दास !
हाय रे मनुपुत्र, अपना आप ही उपहास !
●
प्रकृति को प्रच्छन्नता को जीत
सिंधु से आकाश तक सबको किए भयभीत;
सृष्टि को निज बुद्धि से करता हुआ परिमेय
चीरता परमाणु की सत्ता असीम, अजेय !
◆◆◆◆◆
~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~
(क्रमशः अगली पोस्ट में..)
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#hindikavita

दिनकर कहते हैं कि मनुष्य ने विज्ञान की सीढ़ी चढ़कर जो उत्थान किया, वह मात्र बुद्धि तक ही सीमित रहा। किंतु मनुष्य की आत्मा में वास करने वाले देवता बुद्धि ही नहीं, मोम-सा हृदय भी माँगते हैं। शक्ति और सत्ता के संघर्ष से उपजी थकान और कोलाहल से हटकर आत्मा विश्राम और शांति के दो क्षण चाहती है। दो क्षण - स्वयं में लीन होने के लिए, प्रकृति में समाने के लिए, जिन दो क्षणों में व्यक्ति का तन ही नहीं, मन भी भौतिकता की थकान से आराम पा सके। निरंतर मन को प्रताड़ित कर तन को अथाह कामनाओं की पूर्ति की अग्नि में झोंकता मानव नियति का दास है, और ऐसा दास उपहास का पात्र क्यों न हो? * पढ़िए तन की बोई लालसा की फसल काटकर थके मन के विश्राम का उपाय, छठे सर्ग के इस भाग में - ~~~~~ ~~~~~ किन्तु है बढ़ता गया मस्तिष्क ही नि:शेष, छूट कर पीछे गया है रह हृदय का देश; नर मनाता नित्य नूतन बुद्धि का त्योहार, प्राण में करते दुखी हो देवता चीत्कार । ● चाहिए उनको न केवल ज्ञान देवता हैं मांगते कुछ स्नेह, कुछ बलिदान; मोम-सी कोई मुलायम चीज, ताप पा कर जो उठे मन में पसीज-पसीज; ● प्राण के झुलसे विपिन में फूल कुछ सुकुमार; ज्ञान के मरू में सुकोमल भावना की धार; चाँदनी की रागिनी, कुछ भोर की मुस्कान; नींद में भूली हुई बहती नदी का गान; ● रंग में घुलता हुआ खिलती कली का राज़; पत्तियों पर गूँजती कुछ ओस की आवाज़; आंसुओं में दर्द की गलती हुई तस्वीर; फूल की, रस में बसी-भीगी हुई जंजीर । ● धूम, कोलाहल, थकावट धूल के उस पार, शीतजल से पूर्ण कोई मंदगामी धार; वृक्ष के नीचे जहां मन को मिले विश्राम, आदमी काटे जहां कुछ छुट्टियाँ, कुछ शाम । ● कर्म-संकुल लोक-जीवन से समय कुछ छीन, हो जहां पर बैठ नर कुछ पल स्वयं में लीन । फूल-सा एकांत में उर खोलने के हेतु शाम को दिन की कमाई तोलने के हेतु । ● ले चुकी सुख-भाग समुचित से अधिक है देह, देवता हैं मांगते मन के लिए लघु गेह । हाय रे मानव ! नियति के दास ! हाय रे मनुपुत्र, अपना आप ही उपहास ! ● प्रकृति को प्रच्छन्नता को जीत सिंधु से आकाश तक सबको किए भयभीत; सृष्टि को निज बुद्धि से करता हुआ परिमेय चीरता परमाणु की सत्ता असीम, अजेय ! ◆◆◆◆◆ ~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~ (क्रमशः अगली पोस्ट में..) #ramdharisinghdinkar #dinkar #kurukshetra #hindipoetry #hindikavita

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ramdharisinghdinkar कुरुक्षेत्र के छठे सर्ग में दिनकर द्वापर से आगे आकर वर्तमान पर दृष्टि फेरते हैं। उन्हें यह दिखलाई देता है कि वर्तमान मानव बुद्ध, गाँधी, ईसा, और कृष्ण की कहने को तो बहुत दुहाई देता है, मगर उनकी सीख को अपने आचरण में नहीं लाता। वर्तमान युग में दिनकर विज्ञान का असीम विस्तार देखते हुए कहते हैं कि जहाँ एक ओर पूर्व में ब्रह्मांड प्रकृति के नियमों के अनुरूप चलता रहा, वहीं वर्तमान में मानव ने विज्ञान की सहायता से प्रकृति को अपदस्थ कर स्वयं को सिंहासन पर बिठा लिया है।
*
पढ़िए वर्तमान मानव की कथनी-करनी के भेद और प्रकृति एवं मानव के बीच घटे सत्ता-हस्तांतरण की व्याख्या, छठे सर्ग के पहले भाग में -
~~~~~
~~~~~
धर्म का दीपक, दया का दीप,
कब जलेगा,कब जलेगा, विश्व में भगवान ?
कब सुकोमल ज्योति से अभिसिक्त
हो, सरस होंगे जली-सूखी रसा के प्राण ?
●
है बहुत बरसी धरित्री पर अमृत की धार,
पर नहीं अब तक सुशीतल हो सका संसार ।
भोग-लिप्सा आज भी लहरा रही उद्दाम,
बह रही असहाय नर की भावना निष्काम ।
●
भीष्म हों अथवा युधिष्ठिर या कि हों भगवान,
बुद्ध हों कि अशोक, गांधी हों कि ईसु महान;
सिर झुका सबको, सभी को श्रेष्ठ निज से मान,
मात्र वाचिक ही उन्हे देता हुआ सम्मान,
●
दग्ध कर पर को, स्वयं भी भोगता दुख-दाह,
जा रहा मानव चला अब भी पुरानी राह ।
अपहरण, शोषण वही, कुत्सित वही अभियान,
खोजना चढ़ दूसरों के भस्म पर उत्थान;
●
शील से सुलझा न सकना आपसी व्यवहार,
दौड़ना रह-रह उठा उन्माद की तलवार ।
द्रोह से अब भी वही अनुराग
प्राण में अब भी वही फुँकार भरता नाग ।
●
पूर्व युग सा आज का जीवन नहीं लाचार,
आ चुका है दूर द्वापर से बहुत संसार;
यह समय विज्ञान का, सब भांति पूर्ण, समर्थ;
खुल गए हैं गूढ संसृति के अमित गुरु अर्थ ।
●
चीरता तम को, संभाले बुद्धि की पतवार
आ गया है ज्योति की नव भूमि में संसार ।
आज की दुनिया विचित्र, नवीन;
प्रकृति पर सर्वत्र है, विजयी पुरुष आसीन ।
●
हैं बंधे नर के करों में वारि, विद्युत, भाप,
हुक्म पर चढ़ता उतरता है पवन का ताप ।
है नहीं बाकी कहीं व्यवधान,
लांघ सकता नर सरित, गिरि, सिंधु एक समान ।
●
सीस पर आदेश कर अवधार्य,
प्रकृति के सब तत्त्व करते हैं मनुज के कार्य ।
मानते हैं हुक्म मानव का महा वरुणेश,
और करता शब्दगुण अंबर वहन संदेश ।
●
नव्य नर की मुष्टि में विकराल
हैं सिमटते जा रहे प्रत्येक क्षण दिक्काल ।
यह प्रगति निस्सीम ! नर का यह अपूर्व विकास !
चरण तल भूगोल! मुट्ठी में निखिल आकाश !
◆◆◆◆◆
~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~
(क्रमशः...)
#ramdharisinghdinkar
#dinkar
#kurukshetra
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#hindikavita

कुरुक्षेत्र के छठे सर्ग में दिनकर द्वापर से आगे आकर वर्तमान पर दृष्टि फेरते हैं। उन्हें यह दिखलाई देता है कि वर्तमान मानव बुद्ध, गाँधी, ईसा, और कृष्ण की कहने को तो बहुत दुहाई देता है, मगर उनकी सीख को अपने आचरण में नहीं लाता। वर्तमान युग में दिनकर विज्ञान का असीम विस्तार देखते हुए कहते हैं कि जहाँ एक ओर पूर्व में ब्रह्मांड प्रकृति के नियमों के अनुरूप चलता रहा, वहीं वर्तमान में मानव ने विज्ञान की सहायता से प्रकृति को अपदस्थ कर स्वयं को सिंहासन पर बिठा लिया है। * पढ़िए वर्तमान मानव की कथनी-करनी के भेद और प्रकृति एवं मानव के बीच घटे सत्ता-हस्तांतरण की व्याख्या, छठे सर्ग के पहले भाग में - ~~~~~ ~~~~~ धर्म का दीपक, दया का दीप, कब जलेगा,कब जलेगा, विश्व में भगवान ? कब सुकोमल ज्योति से अभिसिक्त हो, सरस होंगे जली-सूखी रसा के प्राण ? ● है बहुत बरसी धरित्री पर अमृत की धार, पर नहीं अब तक सुशीतल हो सका संसार । भोग-लिप्सा आज भी लहरा रही उद्दाम, बह रही असहाय नर की भावना निष्काम । ● भीष्म हों अथवा युधिष्ठिर या कि हों भगवान, बुद्ध हों कि अशोक, गांधी हों कि ईसु महान; सिर झुका सबको, सभी को श्रेष्ठ निज से मान, मात्र वाचिक ही उन्हे देता हुआ सम्मान, ● दग्ध कर पर को, स्वयं भी भोगता दुख-दाह, जा रहा मानव चला अब भी पुरानी राह । अपहरण, शोषण वही, कुत्सित वही अभियान, खोजना चढ़ दूसरों के भस्म पर उत्थान; ● शील से सुलझा न सकना आपसी व्यवहार, दौड़ना रह-रह उठा उन्माद की तलवार । द्रोह से अब भी वही अनुराग प्राण में अब भी वही फुँकार भरता नाग । ● पूर्व युग सा आज का जीवन नहीं लाचार, आ चुका है दूर द्वापर से बहुत संसार; यह समय विज्ञान का, सब भांति पूर्ण, समर्थ; खुल गए हैं गूढ संसृति के अमित गुरु अर्थ । ● चीरता तम को, संभाले बुद्धि की पतवार आ गया है ज्योति की नव भूमि में संसार । आज की दुनिया विचित्र, नवीन; प्रकृति पर सर्वत्र है, विजयी पुरुष आसीन । ● हैं बंधे नर के करों में वारि, विद्युत, भाप, हुक्म पर चढ़ता उतरता है पवन का ताप । है नहीं बाकी कहीं व्यवधान, लांघ सकता नर सरित, गिरि, सिंधु एक समान । ● सीस पर आदेश कर अवधार्य, प्रकृति के सब तत्त्व करते हैं मनुज के कार्य । मानते हैं हुक्म मानव का महा वरुणेश, और करता शब्दगुण अंबर वहन संदेश । ● नव्य नर की मुष्टि में विकराल हैं सिमटते जा रहे प्रत्येक क्षण दिक्काल । यह प्रगति निस्सीम ! नर का यह अपूर्व विकास ! चरण तल भूगोल! मुट्ठी में निखिल आकाश ! ◆◆◆◆◆ ~कुरुक्षेत्र (षष्ठ सर्ग)~ (क्रमशः...) #ramdharisinghdinkar #dinkar #kurukshetra #hindipoetry #hindikavita

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